जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम और दूरगामी प्रभाव वाले फैसले में वर्ष 2006 से 2014 के बीच कंप्यूटर प्रशिक्षण लेने वाले न्यायिक कर्मचारियों को दो एडवांस इन्क्रीमेंट देने के निर्देश राज्य सरकार को दिए हैं। हाईकोर्ट के इस फैसले से प्रदेश भर के हजारों न्यायिक कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा।
यह फैसला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल शामिल थे, ने 15 याचिकाओं पर एक साथ सुनाया। बेंच ने स्पष्ट किया कि यदि कोई न्यायिक कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुका है, तो उसे भी इस फैसले का लाभ मिलेगा और उसके लिए संशोधित पीपीओ (पेंशन भुगतान आदेश) जारी किया जाए।
क्या था पूरा मामला
ये 15 याचिकाएं जिला न्यायालय जबलपुर के कर्मचारी राकेश वर्मा एवं अन्य की ओर से दाखिल की गई थीं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट की ई-कोर्ट कमेटी के निर्देशों के तहत वर्ष 1990 से देशभर की अदालतों में कंप्यूटरीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके तहत न्यायिक कर्मचारियों ने विधिवत कंप्यूटर प्रशिक्षण प्राप्त किया और नियमित रूप से कंप्यूटर पर कार्य किया।
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 6 फरवरी 2006 को जारी परिपत्र में कंप्यूटर प्रशिक्षण लेने वाले कर्मचारियों को एडवांस इन्क्रीमेंट देने का प्रावधान किया गया था। बाद में 26 सितंबर 2014 को यह परिपत्र वापस ले लिया गया। इसी आधार पर राज्य सरकार के वित्त विभाग ने 4 फरवरी 2020 को न्यायिक कर्मचारियों को इन्क्रीमेंट का लाभ देने से इनकार कर दिया था, जिसके खिलाफ ये याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर की गईं।
हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि राज्य सरकार द्वारा जारी परिपत्र की वैधता अवधि के दौरान जिन कर्मचारियों ने कंप्यूटर प्रशिक्षण लिया था, उनका अधिकार उसी समय बन चुका था। बाद में किसी परिपत्र को वापस लेकर कर्मचारियों से उनका अर्जित अधिकार छीना नहीं जा सकता।
कर्मचारियों को क्या मिलेगा
हाईकोर्ट ने सभी याचिकाएं स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि पात्र न्यायिक कर्मचारियों को एडवांस इन्क्रीमेंट, वेतन एरियर, पेंशन एरियर तथा रिटायर्ड कर्मियों को संशोधित पीपीओ प्रदान किया जाए।
क्यों है फैसला अहम
यह फैसला न केवल वर्तमान न्यायिक कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि उन सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए भी बड़ी जीत है, जिन्हें अब तक कंप्यूटर प्रशिक्षण के बावजूद इन्क्रीमेंट का लाभ नहीं मिला था।